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“सच्चा श्रद्धान, ज्ञान और आचरण ही वास्तविक धर्म है” – बाल ब्रह्मचारी राहुल भईया
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लोक सत्ता भारत
इटावा/जसवंतनगर चेतन जैन
जैन संस्कार शिक्षण शिविर में “धर्म से ही धन है” विषयक वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन
श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे आठ दिवसीय जैन संस्कार शिक्षण शिविर के अंतर्गत रविवार को आयोजित धार्मिक सत्रों में एक अत्यंत प्रेरणादायक और विचारोत्तेजक वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन हुआ।
बाल ब्रह्मचारी राहुल भईया ने ‘श्री रत्नकरण्ड श्रावकाचार’ ग्रंथ के स्वाध्याय के दौरान कहा –
> “जो व्यक्ति श्रद्धा, ज्ञान और आचरण के साथ आत्मा और अन्य द्रव्यों को उनके सत्य स्वरूप में जानता है, वही सच्चा धर्मात्मा है। यही धर्म जीव को संसार से मुक्त कर मोक्ष की ओर ले जाता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि वीतराग धर्म ही जीव का परम आश्रय है। प्रत्येक साधक को अपने जीवन में निर्ग्रंथ मुनि जैसी दीक्षा भावना रखनी चाहिए, ताकि वह जन्म-मरण के दुखों से मुक्त होकर परम मोक्ष सुख प्राप्त कर सके।
वाद-विवाद प्रतियोगिता बनी आकर्षण का केंद्र
रात्रिकालीन सत्र में आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता का विषय था –
“धर्म से धन होता है” बनाम “धन से धर्म”।
प्रतिभागियों ने इस विषय पर अपने-अपने विचार तार्किकता, गहराई और आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत किए।
प्रतियोगिता में वनी जैन, लक्ष्य जैन, चिराग जैन, श्रेयांश जैन, जिनेश जैन, दिव्य जैन, मोक्ष जैन, आकर्ष जैन, निश्चल जैन और आशी जैन ने भाग लिया।
इन प्रतिभागियों ने अपने दृष्टिकोण में दार्शनिक सोच और विवेकशील तर्कों का सुंदर समावेश करते हुए धर्म और धन के परस्पर संबंध पर रोचक बहस की।
दर्शकों ने देर रात तक इन विचारों को गहन रुचि से सुना, और सभागार में सकारात्मक ऊर्जा और वैचारिक जागरूकता का वातावरण बना रहा।


