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बंद हो रहे 5 प्राइमरी स्कूलों को गोद लेने को तैयार:-प्रेम कुमार शाक्य _____
लोकसत्ता भारत
चेतन जैन
जसवंतनगर। सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम कुमार शाक्य ने कहा कि मीडिया खबरों के मुताबिक जनपद में कुछ प्राइमरी स्कूलों को बंद या मर्जर किया जा रहा है। बेसिक शिक्षा अधिकारी ऐसे स्कूलों की सूची अधिकृत रूप से जारी करें। श्री शाक्य ने ऐसे 5 प्राइमरी स्कूलों को सशर्त गोद लेने की बात कही है।
श्री शाक्य ने कहा कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत सरकार की जिम्मेदारी है कि हर बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा सुनिश्चित हो। स्कूलों को बंद या मर्जर किए जाने से तमाम बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाएंगे। उन्होंने कहा कि निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 को आमतौर पर शिक्षा का अधिकार अधिनियम आरटीई कहा जाता है। यह अधिनियम भारत में 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्रदान करता है। इस अधिनियम का उद्देश्य है कि सभी बच्चों को समान अवसर प्रदान करके शिक्षा के क्षेत्र में समानता और न्याय सुनिश्चित करना।
उन्होंने कहा कि अधिनियम के मुख्य प्रावधानों में 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार। सभी बच्चों को नजदीकी स्कूल में प्रवेश और नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए शिक्षकों की योग्यता और प्रशिक्षण पर जोर। निजी स्कूलों में 25 फीसदी सीटें वंचित वर्गों के बच्चों के लिए आरक्षित करना। अधिकारियों को इस पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।
