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बिजली कटौती से बेहाल जनता, दिन में धूप, रात में मच्छरों ने किया परेशान
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लोक सत्ता भारत
चेतन जैन
बिजली कटौती से बेहाल जनता, दिन में धूप, रात में मच्छरों ने किया परेशान
जसवंतनगर।गर्मी के साथ ही अघोषित बिजली कटौती ने नगर और ग्रामीण अंचलों के लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। दिन में चिलचिलाती धूप और रात में बिजली के अभाव में मच्छरों की मार ने लोगों की नींद और सेहत दोनों पर असर डाल दिया है।
भीषण गर्मी के बीच शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बिजली की आंख-मिचौली जारी है। गांवों में जहां 18 घंटे बिजली देने का दावा किया जाता है, वहां मुश्किल से 6–7 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। पनकी कोड से लगभग 5–6 घंटे की कटौती और ग्रामीण फीडरों पर 7–8 घंटे के ब्रेकडाउन, मेंटिनेंस और शटडाउन ने सप्लाई की स्थिति और बदतर बना दी है।
ग्रामीण इलाकों में सिंचाई व्यवस्था से लेकर घरेलू कामकाज तक प्रभावित हो रहे हैं। बुजुर्गों, बीमारों और बच्चों को अत्यधिक गर्मी और उमस के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो रही हैं। लोग मजबूर होकर खुले में सो रहे हैं, लेकिन वहां मच्छरों की परेशानी चैन नहीं लेने देती।
बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गर्मी के कारण खपत बहुत बढ़ गई है। ट्रांसफॉर्मरों पर लोड अधिक होने के कारण फॉल्ट हो रहे हैं। फील्ड टीमें लगातार मरम्मत कार्य में जुटी रहती हैं, लेकिन ज्यादा तापमान तकनीकी कार्यों में बाधा बन जाता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति हर साल दोहराई जाती है। गर्मी शुरू होने से पहले ही विभाग बजट और तैयारी के बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन जमीन पर कुछ भी दिखाई नहीं देता। सवाल उठता है कि हर साल मिलने वाला बजट आखिर जाता कहां है?ग्रामीण इलाकों में स्थिति सबसे भयावह है, जहां लोग रतजगा कर बिजली के इंतजार में रातें गुजार रहे हैं। लो वोल्टेज और अघोषित कटौती से लोगों में गहरा आक्रोश है। शहर में भी बिजली आपूर्ति शेड्यूल के मुताबिक नहीं हो पा रही है।
जनता की मांग है कि बिजली व्यवस्था को स्थायी और व्यवस्थित किया जाए।
व्यंग बेवफ़ा बिजली
जसवंत नगर ।बिजली कैसे पकड़ कर रखी जाय। यह तो हमारा मन बहलाकर रात के अंधेरे का फायदा उठाकर किसी और के साथ रात बिताने चली जाती है और उसका मायका बिजली घर जसवंत नगर उसकी शिकायत भी इसलिए नहीं सुनता क्योंकि उसे पता है कि मेरी बिजली बिटिया मायके में नहीं आएगी और शुरू से आवारा है वह रात में पहले भी गायब हो जाती थी आदतन अब भी गायब होगी। तो बिजली के मायके वाले अर्थात् बिजली घर जसवंत नगर अपना सीयूजी नंबर डिस्टर्ब कर रखता है ।कि बिजली के विषय में कोई उन्हें कुछ पूछ ही नहीं सकता। और वे समाज के सामने साफ सुथरे चरित्रवान बने रहेंगे। किंतु जसवंत नगर बिजली घर तेरी बिजली चरित्रहीन है और शाम को मेरे साथ थी रात बारह बजे तक रही किन्तु मेरे सोने और रात के अंधेरे का फायदा उठाकर किसी और के साथ गायब हो गई। और अब 5:57 सुबह तक नहीं आई। न ही सही पता कि वह किसके साथ रंगरेलियां मना रही है। तेरे चक्कर में तेरा लड़का इनवर्टर रो रो कर बेहोश हो गया तेरा परिवार पंखा, कूलर भी बेहोश हो गए अब वे कोई हरकत नहीं कर रहे। हम तो तेरे जाने के बाद सबको देखते देखते सो ही नहीं पाए। निश्चित ही बिजली तू बेवफा और तेरा मायका बिजली घर जसवंत नगर सपरिवार अपनी बिजली जैसा चरित्र हीन और झूठा तथा मक्कार लग रहा है। क्योंकि उसने तो सीयूजी नंबर भी गड़बड़ कर रखा है।
आप सभी लोगों से विनम्र अपील है यदि किसी को बिजली पुत्री बिजली घर जसवंत नगर कहीं मिले या दिखे तो मोहल्ला लुधपुरा रेलमंडी वन तलैया वाले ट्रांसफार्मर तक पहुंचाने का कष्ट करें। ईश्वर आपका भला करेगा।
