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बारह भावना नृत्य-नाटिका की शानदार प्रस्तुतिसंसार के स्वरूप को समझने एवं चिंतन की प्रेरणा
लोक जन सत्ता
चेतन जैन /जसवंतनगर 9045119008
बारह भावना नृत्य-नाटिका की शानदार प्रस्तुति
संसार के स्वरूप को समझने एवं चिंतन की प्रेरणा
जसवंतनगर। नगर स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित जैन संस्कार शिक्षण शिविर में तीसरे दिन भी विविध कार्यक्रमों की धूम रही। उत्साही शिविरार्थियों ने पूरे जोश और समर्पण के साथ दिनभर की गतिविधियों में भाग लिया।
रात्रिकालीन कार्यक्रम में मंगलाचरण के उपरांत जैन धर्म की बारह भावनाओं पर आधारित एक भावपूर्ण नृत्य-नाटिका का मंचन किया गया। इस नाटिका ने दर्शकों को वैराग्य से अभिभूत कर दिया।

उपस्थित जनसमूह ने न केवल इस प्रस्तुति की सराहना की, बल्कि इससे मिले आध्यात्मिक संदेशों से भी प्रभावित हुए। कार्यक्रम की संयोजिका सारिका जैन ने बताया कि बारह भावना जैन धर्म में ध्यान और चिंतन का मूल आधार हैं, जो आत्मा, कर्म और संसार के वास्तविक स्वरूप को समझने और तदनुसार जीवन जीने की प्रेरणा देती हैं।
सुबह के सत्र में योगाभ्यास के पश्चात श्री जिनेंद्र भगवान का अभिषेक एवं पूजन आदि अनुष्ठान संपन्न हुए। शाश्वतधाम, उदयपुर से पधारीं विदुषी बहनें – प्रज्ञा जैन, समृद्धि जैन एवं छवि जैन ने बच्चों को पूजन की विधियों, उसके पांच अंगों, शुद्ध भावों एवं तत्व चिंतन की विधि को सरल और भावपूर्ण ढंग से समझाया।
शिविर में सहभागियों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है, जो इसकी लोकप्रियता और आध्यात्मिक प्रभाव को दर्शाता है। इस आयोजन को सफल बनाने में संलग्न समर्पित टीम दिन-रात परिश्रम कर रही है, जो निश्चित ही सराहनीय है।
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