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शव वाहन को नहीं दी गई पुल पार करने की अनुमति,मां का शव स्ट्रेचर पर लेकर एक किलोमीटर पैदल चला बेटा….।।
शव वाहन को नहीं दी गई पुल पार करने की अनुमति,मां का शव स्ट्रेचर पर लेकर एक किलोमीटर पैदल चला बेटा….।।
कानपुर-सागर हाईवे पर आवागमन बंद होने के कारण एक बेटे को अपनी मां के शव को स्ट्रेचर पर लेकर एक किलोमीटर पैदल चलना पड़ा….।।
पुल पर तैनात कर्मियों ने शव वाहन को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी…।।
हमीरपुर: कानपुर सागर नेशनल हाईवे (NH-34) पर यमुना नदी पर बना पुल मरम्मत के कारण बंद था. इसी दौरान एक युवक को अपनी मां का शव स्ट्रेचर पर लेकर पैदल पुल पार करना पड़ा क्योंकि पुल पर ड्यूटी में लगे कर्मियों ने शव वाहन को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी….।।
शनिवार की सुबह 6 बजे से रविवार की सुबह 6 बजे तक यमुना नदी पुल की मरम्मत के लिए भारी वाहनों का आवागमन रोक दिया गया था. इसी दौरान, सुबह करीब 7 बजे जब हमीरपुर सदर विधायक डॉ. मनोज प्रजापति की गाड़ी पुल पर पहुंची,तो पुल पर ड्यूटी कर रहे कर्मियों ने बिना किसी रोकटोक के ससम्मान उन्हें पुल पार कर आगे जाने दिया….।।
कानपुर से आए एक शव वाहन को पुल पार करने की अनुमति नहीं दी गई…।।
वहीं कानपुर से आए एक शव वाहन को पुल पार करने की अनुमति नहीं दी गई. शव वाहन में मौजूद परिजन कई बार गिड़गिड़ाए, लेकिन उनकी विनती को नजरअंदाज कर दिया गया.आखिरकार, शव वाहन चालक और बेटे ने स्ट्रेचर की मदद से शव को एक किलोमीटर लंबी दूरी तक पैदल पुल पार कराया….।।
रास्ते में चार जगह शव को नीचे रखना पड़ा,फिर उठाकर चलना पड़ा…।।
रास्ते में चार जगह शव को नीचे रखना पड़ा, फिर उठाकर चलना पड़ा. थाना सुमेरपुर के टेढ़ा गांव निवासी बिंदा ने बताया कि उसकी मां शिवदेवी का पैर फैक्चर हो गया था. उन्हें इलाज के लिए कानपुर ले जाया गया था. वहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई. शनिवार को वह अपनी मां का शव लेकर गांव लौट रहा था, लेकिन यमुना पुल बंद होने से उनके शव वाहन को रोका गया. जबकि मंत्री और अफसरों की गाडियां यहां से गुजरती रही…।।
मरम्मत के कारण कानपुर-सागर हाईवे पर आवागमन बंद…।।
मजबूरी में स्ट्रेचर का सहारा लेना पड़ा और फिर ऑटो की मदद से शव गांव पहुंचाया गया. घटना के बाद आमजन में नाराजगी है. लोगों का कहना है कि पुल बंद करने के दौरान प्रशासन को आपात स्थिति के लिए छूट देनी चाहिए थी. एक तरफ VIP गाड़ियों को जाने दिया गया और दूसरी ओर एक बेटे को अपनी मां के शव के साथ संघर्ष करना पड़ा यह व्यवस्था की विफलता का प्रतीक है….।।
