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इटावा: एक सोच, एक संदेश “आलोक दीक्षित अध्यक्ष उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल इटावा”
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चेतन जैन
इटावा: एक सोच, एक संदेश
जब देश के अनेक हिस्सों में साम्प्रदायिक तनाव की खबरें आती हैं, तब इटावा की मिट्टी हर बार यह साबित करती है कि भाईचारा ही सबसे बड़ी ताक़त है।
यह ज़मीन केवल ज़िले की सीमा नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, विवेक और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक बन चुकी है।
विरोधी ताकतों ने समय-समय पर यहां की एकता को तोड़ने की कोशिश की, लेकिन इटावा के लोगों ने कभी नफरत को अपने दिल में जगह नहीं दी। यहां नारा नहीं लगता, यहां रिश्ते बनते हैं।
यहां नफरत नहीं, साझा चूल्हे और साझी खुशियाँ हैं।
आज जब ‘85-15’ जैसे विभाजनकारी नारे गूंजने की कोशिश करते हैं, तब इटावा एक सुर में कहता है — “हमारी एकता को कोई नहीं तोड़ सकता।”
दान्दरपुर की हालिया घटना ने हम सबको एक बार फिर सोचने पर मजबूर किया है — कि दुख किसी एक का नहीं होता, समाज का होता है।
यह समय आरोप-प्रत्यारोप या पक्ष-विपक्ष की राजनीति का नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और सामाजिक ज़िम्मेदारी का है।
हर इटावा वासी की यह नैतिक ज़िम्मेदारी है कि वह अपने शहर को राजनीतिक और मीडिया के एजेंडों का मोहरा न बनने दे।
इटावा सिर्फ एक भूगोल नहीं है,
इटावा एक सोच है — प्रेम की, शांति की, और भाईचारे की।
और इसी सोच ने इटावा को उत्तर प्रदेश में एक अलग और उजली पहचान दी है।
