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सरकार को खुली चुनौती देते अवैध गुटका निर्माण व व्यापार का गढ बना हमीरपुर का राठ शहर…।।
सरकार को खुली चुनौती देते अवैध गुटका निर्माण व व्यापार का गढ बना हमीरपुर का राठ शहर…।।
हमीरपुर। यूपी के बुंदेलखंड का सबसे अविकसित लेकिन शिक्षा, कृषि के क्षेत्र में हमेशा अव्वल रहा और राजनीति के मामले में भी झंडे गाडने वाला, पं परमानन्द, स्वामी ब्रह्मानंद की जन्म व कर्म स्थली वाले इलाके राठ को पता नहीं किसकी बद्दुआ लग गई कि क्षेत्र में सारे कानून विरोधी और आपराधिक कृत्यों की बाढ़ आ गई है। गुड, गन्ना, घी, श्रीअन्न के व्यापार के बीच पता नहीं कैसे मादक द्रव्य और तंबाकू, गुटका का वर्जित व्यापार यहां गली-गली पनप रहा है। भूमाफिया, जुआं माफिया, शराब माफिया के साथ अब गुटका माफिया भी यहां को कलंकित कर रहे है। राज्य सरकार द्वारा प्रतिबंधित देशी गुटके की सबसे अधिक बिक्री और खपत अब राठ नगर में हो रही है। यहां प्रतिदिन लगभग 4 लाख की अवैध गुटका बिक्री दर्ज की जा रही है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन और संबंधित विभागों की चुप्पी इस कारोबार को परोक्ष संरक्षण दे रही है। इससे जहां शासन को भारी राजस्व की हानि हो रही है, वहीं लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
राठ क्षेत्र में गुटका और देशी गुटकी का सेवन अब सिर्फ युवाओं तक सीमित नहीं है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों और महिलाओं तक इसका सेवन आम हो गया है। यह लत धीरे-धीरे सामाजिक और पारिवारिक ताने-बाने को कमजोर कर रही है। नगर में कई स्थानों पर बिना लाइसेंस या आंशिक अनुमति के देशी गुटका का निर्माण किया जा रहा है। कुछ निर्माता सिर्फ एक या दो मशीनों को पंजीकृत दिखाकर छिपे तौर पर कई मशीनों से उत्पादन कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो एक कुख्यात गुटका माफिया, जो पहले जेल जा चुका है, अब फिर से अपना नेटवर्क फैला चुका है। वह समय-समय पर निर्माण स्थल बदलता रहता है और फिर मारुति ईको जैसे वाहनों से सुबह-सुबह गुटका की खेप नगर के प्रमुख प्रतिष्ठानों तक पहुंचाई जाती है। देशी गुटकी में तंबाकू और अन्य रसायनों का मिश्रण एक ही पाउच में उपलब्ध है, जो राज्य सरकार के निर्देशों का उल्लंघन है। इसके नियमित सेवन से भूख में कमी, दांतों की बीमारियां और कैंसर जैसी घातक समस्याएं सामने आ रही हैं। जीएसटी और खाद्य विभाग की टीमें कभी-कभार नगर में आकर छोटे दुकानदारों पर जुर्माना लगाकर खानापूरी कर लेती हैं। लेकिन जब बात बड़े माफिया की होती है, तो वे घंटों उसके प्रतिष्ठान में बंद दरवाजों के पीछे रहकर लौट आते हैं — बिना किसी ठोस कार्रवाई के। नगर में गुटके का खुला कारोबार होते देख स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता लोगों के बीच चिंता और आक्रोश का विषय बनी हुई है। नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि जब पूरा नगर जानता है कि यह धंधा कहां और कैसे चल रहा है, तो प्रशासन क्यों नहीं जानता?
