‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान की जिला संगोष्ठी आयोजित, वृक्षारोपण को बताया मातृत्व और प्रकृति से जुड़ाव का माध्यम
इटावा।
‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के द्वितीय चरण के अंतर्गत सिंचाई विभाग गेस्ट हाउस में भाजपा जिलाध्यक्ष अरुण कुमार ‘अन्नू’ गुप्ता की अध्यक्षता में जिला स्तरीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
संगोष्ठी की मुख्य अतिथि एवं उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय स्तर पर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने अभियान को सिर्फ एक पर्यावरणीय पहल न मानते हुए उसे भावनात्मक आंदोलन करार दिया
> “‘एक पेड़ माँ के नाम’ सिर्फ वृक्षारोपण नहीं, बल्कि यह मातृत्व और प्रकृति से जुड़ने की एक आत्मीय कोशिश है,” — अपर्णा यादव
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे हर वर्ष अपनी उम्र के बराबर पौधे लगाएं और उन्हें परिवार के सदस्य की तरह पालें। उन्होंने इसे माताओं के योगदान को सम्मान देने और पृथ्वी के स्वास्थ्य में भागीदारी का सशक्त माध्यम बताया।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए सदर विधायक सरिता भदौरिया ने इसे जन आंदोलन का रूप देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हर नागरिक को अपनी माँ के नाम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए।
पूर्व सांसद रघुराज शाक्य ने जलवायु परिवर्तन पर चिंता जताते हुए कहा कि वृक्षारोपण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। “धरती तभी बचेगी जब हरे वृक्ष होंगे,” उन्होंने कहा। साथ ही, उन्होंने माँ के ऋण को अमूल्य बताते हुए सभी से वृक्षारोपण की अपील की।
जिलाध्यक्ष अरुण कुमार ‘अन्नू’ गुप्ता ने समापन उद्बोधन में कहा कि पेड़ जीवनदायी होते हैं। “जिस प्रकार माँ अगली पीढ़ी को सुरक्षा, पोषण और भविष्य देती है, ठीक उसी तरह एक पेड़ भी जीवन को आधार देता है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने कहा कि इस अभियान के माध्यम से हम न केवल माताओं के सम्मान में एक स्थायी स्मृति बना रहे हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
संगोष्ठी में पूर्व विधायक सावित्री कठेरिया, निवर्तमान जिलाध्यक्ष संजीव राजपूत, पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. रमाकांत शर्मा, गोपाल मोहन शर्मा, अजय धाकरे एवं पूर्व जिलाध्यक्ष झांसी संजय दुबे समेत अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
उत्तर प्रदेश में पिछले आठ वर्षों के दौरान 204 करोड़ पौधों का रोपण किया गया है, जिनमें से लगभग 75% पौधे जीवित हैं। इसके परिणामस्वरूप राज्य में वन क्षेत्र में 5 लाख एकड़ की वृद्धि दर्ज की गई है।
