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पंच नमस्कार णमोकार मंत्र का हुआ सामूहिक पाठ, योग से मिला स्वास्थ्य का संदेश
जैन संस्कार शिविर के दूसरे दिन बच्चों को मिले शारीरिक व मानसिक बल के सूत्र
लोक जन सत्ता







चेतन जैन
जसवंतनगर
नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे आठ दिवसीय जैन संस्कार शिक्षण शिविर के दूसरे दिन रविवार को शिविरार्थियों को योग अभ्यास के माध्यम से शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त बनने का संदेश दिया गया।
प्रातःकालीन सत्र में पतंजलि योगपीठ से प्रशिक्षित योग शिक्षिका रानी वर्मा द्वारा विभिन्न योग आसनों का अभ्यास कराया गया। उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा, “यदि हम शारीरिक रूप से स्वस्थ रहते हैं तो मानसिक संतुलन अपने आप बेहतर होता है। प्राकृतिक जीवनशैली अपनाकर अनेक गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।”
रानी वर्मा ने बच्चों को ध्यान, प्राणायाम, सूर्य नमस्कार सहित कई सरल योगासन कराए, जिससे उनमें उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ।
धार्मिक अनुष्ठानों में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
योग सत्र के उपरांत मंदिर प्रांगण में पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान जैसे अभिषेक, पूजन आदि सम्पन्न हुए। दोपहर में शिविरार्थियों द्वारा सामूहिक रूप से पंच परमेष्ठी णमोकार महामंत्र का जाप किया गया। यह मंत्र जैन धर्म में अनादि निधन मंत्र के रूप में प्रतिष्ठित है, जो आत्मा की शुद्धि, पापों के क्षय और जीवन में आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है।
शिविर में बताया गया कि पांच परमेष्ठी – अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु – जैन धर्म के मूल स्तंभ हैं, और णमोकार मंत्र उन्हीं की वंदना का प्रतीक है। इस मंत्र का नियमित जाप जीवन में शुभ ऊर्जा और आध्यात्मिक बल प्रदान करता है।
सिद्धांतों की शिक्षा भी बनी शिविर का आधार
शिविर के दौरान धर्मशास्त्रों की कक्षाएं भी चलाई जा रही हैं, जिनमें विभिन्न आयु वर्ग के बच्चों को जैन धर्म के आवश्यक सिद्धांत, आचरण, इतिहास और जीवनशैली की गहन जानकारी दी जा रही है। जानकारी के अनुसार, लगभग 100 से अधिक शिविरार्थी इन कक्षाओं में भाग ले रहे हैं।
